आरा सदर अस्पताल में इलाज के अभाव में बच्चे की मौत।
आखिर बच्चे की मौत का जिम्मेदार कौंन?
Report By :- Zishan Ali with Md.Wasim.
आरा/भोजपुर। भोजपुर जिले में पिछले चार दिनों से जिला प्रशासन और डॉक्टरों के बीच की लड़ाई बिकराल रूप धारण करते जा रहा है।जिसका खामियाजा लगातार आम जनता को ही भुगतना पड़ रहा है। एक के बाद बड़ी घटना घटते चली जा रही है। मगर ना ही सरकार और ना ही चिकित्सकों के संगठन को बेबस और लाचार मरीजों के सेहत के बारे में चिंता है।
ताजा मामला है भोजपुर जिले के मुख्यालय स्थित आरा सदर अस्पताल की जहाँ डाक्टरों के हड़ताल के बीच इलाज के अभाव में एक 9 वर्षीय महादलित बच्चे की मौत हो गई है। इलाज के अभाव में हुए बच्चे के मौत का गंभीर आरोप परिजनों ने प्रशासन और डॉक्टरों की लापरवाही पर लगाया है। परिजनों का कहना है कि अगर हड़ताल नहीं होता तो हमारे मासूम बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। अच्छे डॉक्टर के ड्यूटी पर नहीं होने के कारण ही बच्चे की मौत हुई है।मिली जानकारी के अनुसार ऐसा बताया जा रहा है कि बच्चे के पेट में अचानक से दर्द उठा था, जिसके बाद उसको इलाज के लिए तत्काल निजी अस्पताल में ले जाया गया मगर वहाँ हड़ताल के कारण ताला लटका था। उसके बाद परिजन बच्चे को आरा सदर अस्पताल ले आये जहाँ डॉक्टर कि हड़ताल के कारण उपचार नही हो सका जिससे बच्चे की दुःखद मौत हो गई। बच्चे के मौत के बाद महादलित परिवार में दुःख के कारण मातम पसर गया। माँ की रो-रोकर बुरा हाल है। 9 वर्षीय मृतक राहुल नट, दावत थाना क्षेत्र के मालियाबाग गाँव के निवासी कमलेश नट का पुत्र बताया जा रहा है।
वहीं बच्चे की मौत के बाद आरा सदर अस्पताल के अधीक्षक सतीश कुमार का कहना है कि लापरवाही नहीं कि गई है। बच्चे का पहले से ही कही दूसरी जगह इलाज कराया जा रहा था। आयुष चिकित्सक भी पढ़े लिखे हैं इसलिए ही सरकार उनको मान्यता दी हुई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आरोप-प्रत्यारोप से जंगल में लगे आग की तरह पूरे बिहार में फैला डाक्टरों और प्रशासन के बीच की लड़ाई में हो रही मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है। चार दिनों से आखिर क्यों सूबे के मुखिया नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय कानों में रुई डालकर सोए हुए हैं। गरीब जनता की जान की इतनी क्षति होने के बाद क्या बिहार सरकार को इस मामले में मध्यस्थता करने की जरूरत नहीं है। जिससे कि जल्द से जल्द कोई निवारण निकाला जा सके और सभी सरकारी अस्पतालों में विधिवत तरीके से स्वास्थ्य सुविधा को बहाल किया जा सके।
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