बात उन दिनो से शुरू होती है जब मेरे दादा द्वारा जब मुझे बोला गया कि जिशु तुम्हे अंगूर मिला जब मैंने बोला नही तो बोला गया राफात को दिया है जब उसको बुला के पूछा तो बोला कि मैंने कहा लिया तो दादा ने 5 रुपया दिया उस समय ये छोटी बात लगी लेकिन अब ऐसा लगता है कि शायद उसी समय से हमलोग को पछाड़ने का होड़ सुरु हुआ........
अब मैं सबके सामने अपनी कहानी लेकर आया हूँ जिसमे मैं आपको अपनी आपबीती सुनाऊंगा।
इस अंक का विशेष..
कैसे लोग जायदाद के लिए अपने ही खून के जानी दुश्मन हो जाते हैं।
कैसी बीती मेरी स्कूल की जिंदगी।
इंटर परीक्षा के समय की कहानी।
होस्टल से लेकर डिग्री का सफर।
रिस्तेदारों द्वारा भीखमंगा का खिताब मिलने का सफर।
मेरे परिवार को किस तरह हर जगह बेइज्ज़त किया गया।
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